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रविवार, 13 सितंबर 2009

बुंदेलखंड में पनप सकता है नक्सलवाद : संजय पाण्डेय

महोबा। आज बुंदेलखंड क्षेत्र के निवासियों को तंगहाली के दौर में जिस मनोदशा से गुजरना पड़ रहा है । उसको देखते हुए अंदेशा है कि यदि अधिक समय तक उन्हें कोई रास्ता नहीं मिला तो वे नक्सली रुख अपना सकते हैं। केंद्र तथा राज्य सरकारों के अलावा प्रकृति भी बुंदेलखंड वासियों का साथ नहीं दे रही है। पिछले पांच वर्षों से सूखा ग्रस्त इस क्षेत्र में इस वर्ष भी खेती की स्थिति दयनीय है। क्षेत्र में उद्योगों का अभाव है । लोगों की पलायन करने की दर बढती जा रही है। महानगरों में यहाँ के मजदूरों का बुरी तरह शोषण होता है किन्तु फिर भी भुखमरी से अपनी जान बचाने के लिए लगभग आधे लोग शहरों का रुख कर चुके हैं । लाख कोशिशों के बावजूद मजदूरों का पलायन नहीं रुक पा रहा है। बीते शनिवार झाँसी रेलवे स्टेशन पर केन्द्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री प्रदीप जैन ने भी बुंदेलखंड छोड़कर दिल्ली जा रहे कुछ ग्रामीणों को समझाया कि वे पलायन न करे , हम यही पर कुछ न कुछ व्यवस्था करेंगे किन्तु लोग नहीं मने। बल्कि इस पर टीकमगढ़ के एक मजदूर गोबिंददास ने जबाब दिया कि सरकार के भरोसे हम भूख से ही मर जायेंगे। कहने का मतलब सरकार पर से लोगों का भरोसा उठ चुका है।
गोबिंद दास जैसे मजदूरों के अलावा ऐसे लोग भी तंगी से गुजर रहे है जो कभी जमींदार हुआ करते थे। आज वे भी दो वक्त के भोजन के लिए संघर्षरत हैं। उनके बेरोजगार लड़के लड़कियां खाली बैठे हुए हैं ,परिणाम स्वरुप विवाह भी नहीं हो पा रहा है। निम्न वर्ग के लोग तो दिल्ली जाकर मजदूरी कर सकते हैं किन्तु यहाँ का उच्चवर्ग रूढीवादी होने के कारण भूखे रहते हुए भी चाहारदिवारी से बाहर जाने को तैयार नहीं। इसलिए ऐसे लोग अन्दर ही अन्दर घुट रहे हैं। रात रात भर जाग कर कभी सरकार को कोसते हैं तो कभी प्रकृति को। किन्तु पेट पलने का कोई रास्ता फ़िलहाल नहीं मिल पा रहा है। पिछले हफ्ते महिलाओं के बेचे जाने का मामला मीडिया में आया ,जिससे यहाँ की हकीकत देश के सामने आई।
इस पर बुंदेलखंड एकीकृत पार्टी के संयोजक संजय पाण्डेय का कहना है कि यदि ज्यादा समय तक प्रकृति का यही रुख रहा और सरकारों ने कोई कारगर कदम न उठाया तो यहाँ अराजकता का माहौल होगा, १०-२० रुपये के लिए छीना झपटी होगी। सरकारों की तरफ से बुरी तरह हताश हो चुके लोगों में अब आक्रोश उबाल लेने लगा है । दूर दूर तक उन्हें गुजारे का कोई रास्ता नहीं दिख रहा है,ऐसे में संभव है कि लोग नक्सलवाद की रह पकड़ लें।

बुधवार, 9 सितंबर 2009

केन्द्र सरकार राजी, राज्य सरकारें भी राजी ,फ़िर देरी क्यों ?: संजय पाण्डेय

केन्द्र सरकार और राज्य सरकारों का प्रतिनिधितित्व करने वाले कई वरिष्ठ नेतागण जब बुंदेलखंड आते हैं तो वहां की जनता के बीच में तो पृथक बुंदेलखंड राज्य की खुली वकालत करते है किंतु वापस आते ही इस मुद्दे को भूल जाते हैं। बुंदेलखंड एकीकृत पार्टी का आरोप है कि गुमराह करने का ऐसा ही क्रम पिछले 50 सालों से चल रहा है । वर्ष 1955 में फजल अली की अध्यक्षता में गठित हुए राज्य पुनर्गठन आयोग की पुरजोर शिफारिश के बावजूद आज तक बुंदेलखंड राज्य का गठन सम्भव नही हो सका। पिछले दो वर्षों से उप्र की मुखिया मायावती अपनी जनसभाओं और रैलियों में बुंदेलखंड राज्य निर्माण की तरफ़ दारी करती हैं किंतु जब इस आशय का विधेयक राज्य विधान सभा से पारित करवाने की बात आती है तो बहन जी पीछे हट जाती हैं । इसी तरह केन्द्र की यूपीए सरकार के प्रमुख नेता गण जिनमे डॉ मनमोहन सिंह तथा राहुल गाँधी स्वयं को पृथक बुंदेलखंड राज्य का हिमायती तो बताते हैं किंतु सरकार कोई संसदीय पहल नही कर रही। पार्टी संयोजक संजय पाण्डेय ने कहा कि ऐसे हालातों में यही निष्कर्ष निकलता है कि बुंदेलखंड मसले पर पूर्व की तरह सिर्फ़ बयान बाजी से काम चलाया जा रहा है। कहा कि यद्यपि राहुल गाँधी जी में बुंदेलखंड के प्रति कुछ करने की कसक है ,किंतु उनकी सोच का क्रियान्वयन भी तो जरूरी है। सोचने या बयान देने मात्र से बुंदेलखंड की समस्या का हल तो नही हो सकता।मप्र तथा उप्र के बीच फंसे बुंदेलखंड क्षेत्र की चिर उपेक्षा का परिणाम है कि यह आज देश के सबसे पिछडे क्षेत्रों में से एक है। किंतु इसके पृथक राज्य बनने के बाद यहाँ केंद्रित विकास होने से स्थिति में सुधार आएगा । इसलिए सरकारें इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर हीला हवाली न करते हुए जल्द अपना रुख स्पष्ट करें । पाण्डेय ने बुंदेलखंड वासियों से भी पलायन और आत्महत्या का रास्ता छोड़ अपने अधिकारों के लिए क्रांति अख्तियार करने की अपील की।

रविवार, 31 मई 2009

बुंदेलखंड एकीकृत पार्टी

बुंदेलखंड एकीकृत पार्टी भारत निर्वाचन आयोग से पंजीकृत एक राजनीतिक दल है . इसका कार्य क्षेत्र उत्तर प्रदेश तथा मध्य प्रदेश का वह हिस्सा है जो भौगोलिक तौर से बुंदेलखंड में आता है .भारत की यह पार्टी पृथक बुन्देलखंड राज्य के लिए सतत रूप से संघर्ष रत है. इस मांग को लेकर ही संजय पाण्डेय के नेत्रत्व में पार्टी ने कई धरने प्रदर्शन किये . मध्य प्रदेश विधान सभा चुनावों में भी पार्टी ने भाग लिया